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This blog and the one following the same, are my attempts with hindi writing and poetry.

Indeed, thoughts and emotions do not have one language. A sudden contemplation.

बैठे बैठे उस रौशनी को ढूंढती थी,

जिसमे एक अनोखी आवाज बेहती थी ;

न जाने वक़्त कहाँ ले जाकर छोड दे हमेंं,

कही अनकही आवाज खो ना जएेँ कहीं ।

हर पल बदलती इस अजीब सी दुनिया में,

एक वादा निभाना तुम;

अगर मेरी आवाज तुम तक पहुँच जाएे,

इन बढती वक़्त के दायरे से भी,

तो मेरी रौशनी बन जाना तुम,

तो मेरी रौशनी बन जाना तुम ।।

-निकिता

(Please excuse errors in matras or in language!)

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