Why-Its-Better-to-Be-Alone-Than-With-the-Wrong-Person

A story woven through hindi poetry-

(My second attempt with matras and bindus!)

यूँ तोः हमारी ज़िन्दगी में सब कुछ था,
चेहरे पे मुस्कान और मन में शान्ति
वह कोशिश करते करते हम , छोटे और बड़े काम,
सोचा धीरे धीरे सफलता की सीढ़ी चढ़ेंगे ।
खुद पर बनी विश्वास को पकड़ कर रखना पड़ता;
जब अकेले अनजान रास्तों पे निकल जाते थे हम;
जब कुछ पाने की आस में पैसे इकठा करते थे हम,
जब अजनबी उन लोगों से मिलते थे हम हस हस कर,
एक नकाब पेहेनके दर को छुपा लेते थे हम ।
चिंता होती तोह थी , पर विश्वास से घोट जाते थे उसे हम ।

एक दिन युहीं उस अनजान रास्ते पे चले जा रहे थे,
उसी मन की शान्ति और खुद पर गौरव रखते,
जब अचानक वह परिचित चेहरा देखा हमने;
एक नयी रिश्ते की शुरूरत में
हाथ बढ़ाते हुए,
हम थोड़े से घबराते हुए आगे तोः आये,
लेकिन हाथ थामने में बोहोत कतराएं ।

न जाने कब यह चेहरे हमने अपने दिल में बसा लिया,
और यह हाथ जोः थामा, वह छोरा नहीं जा रहा

अब भी, यूँ तोः हम अकेले अगर चलते भी हैं,
तोः बिना हाथ बढ़ाये ही , हमें साथ मिल जाता,
बिना किसी डर के हम आगे बढ़ जाते हैं
और खुद पर बनी विश्वास को आप भी सरहाते हैं ।

चेहरे की मुस्कान और मन की शान्ति अब और भी हसीं हैं,
क्यूंकी सफलता की तरफ हम , एक कदम और नज़दीक हैं ।

यूँ तोः हमारी ज़िन्दगी में सब कुछ था;
पर आपके साथ यह सफर और भी रंगीन है,
अब छोटे -बड़े काम करने की कोशिश और भी मज़बूत होती है,
अब सफलता की सीढ़ी साथ में चढ़ते हैं,
अब अलग सी पहचान बन गयी है,
अब हम कोई नकाब नहीं पहनते हैं ,
और खुद पर बनी विश्वास को आप भी सरहाते हैं ।
अपनी चेहरे की ख़ुशी को हम , आपका ही नाम देते हैं ।

यूँ तोः हमारी ज़िन्दगी में सब कुछ था ;
पर आपके साथ ने ज़िन्दगी को पूरा कर दिया,
आपके साथ ने ज़िन्दगी को पूरा कर दिया॥

-निकिता

 hold-hands
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